तारों की जोत में चंद्र छिपे नहीं – राजस्थानी गीत

तारों की जोत में चंद्र छिपे नहीं
सूर्य छिपे नही बादल छाए,
रण चढ़िया रजपूत छिपे नहीं
दाता छिपे नहीं माँगन आये,
चञ्चल नारि का नैन छिपे नहीं
प्रीत छिपे नहीं पूठ दिखाए,
गंग कहे सुण शाह अकबर
कर्म छिपे नहीं भभूत लगाए।

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